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mahabharat 12.284.191: दक्ष से ऐसा कहकर महाबली महादेवजी अपनी पत्नी और पार्षदों सहित वहाँ अन्तर्धान हो गये।   |   mahabharat अध्याय 12.284: पार्वतीके रोष एवं खेदका निवारण करनेके लिये भगवान् शिवके द्वारा दक्षयज्ञका विध्वंस, दक्षद्वारा किये हुए शिवसहस्रनामस्तोत्रसे संतुष्ट होकर महादेवजीका उन्हें वरदान देना तथा इस स्तोत्रकी महिमा   ।   mahabharat पर्व 12: शान्ति पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 12: शान्ति पर्व  »  अध्याय 284: पार्वतीके रोष एवं खेदका निवारण करनेके लिये भगवान् शिवके द्वारा दक्षयज्ञका विध्वंस, दक्षद्वारा किये हुए शिवसहस्रनामस्तोत्रसे संतुष्ट होकर महादेवजीका उन्हें वरदान देना तथा इस स्तोत्रकी महिमा  »  श्लोक 191
 
 
श्लोक  12.284.191 
एवमुक्त्वा महादेव: सपत्नीक: सहानुग:।
अदर्शनमनुप्राप्तो दक्षस्यामितविक्रम:॥ १९१॥
 
 
अनुवाद
दक्ष से ऐसा कहकर महाबली महादेवजी अपनी पत्नी और पार्षदों सहित वहाँ अन्तर्धान हो गये।
 
Saying this to Daksha, the mighty Mahadevji along with his wife and councilors disappeared there.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)