Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 12.284.185: दक्ष! दक्ष! इस यज्ञ में जो विघ्न हुआ है, उसके लिए शोक मत करो। मैंने पूर्व कल्प में भी तुम्हारे यज्ञ का विध्वंस किया था। यह घटना भी पूर्व कल्प के अनुसार ही घटित हुई है॥185॥ | mahabharat अध्याय 12.284: पार्वतीके रोष एवं खेदका निवारण करनेके लिये भगवान् शिवके द्वारा दक्षयज्ञका विध्वंस, दक्षद्वारा किये हुए शिवसहस्रनामस्तोत्रसे संतुष्ट होकर महादेवजीका उन्हें वरदान देना तथा इस स्तोत्रकी महिमा । mahabharat पर्व 12: शान्ति पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
दक्ष! दक्ष! इस यज्ञ में जो विघ्न हुआ है, उसके लिए शोक मत करो। मैंने पूर्व कल्प में भी तुम्हारे यज्ञ का विध्वंस किया था। यह घटना भी पूर्व कल्प के अनुसार ही घटित हुई है॥185॥
‘Daksha! Daksha! Do not be sorry for the disturbance caused in this yajna. I had destroyed your yajna in the previous kalpa too. This incident has also happened according to the previous kalpa.॥ 185॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥