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श्री महाभारत
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पर्व 12: शान्ति पर्व
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अध्याय 284: पार्वतीके रोष एवं खेदका निवारण करनेके लिये भगवान् शिवके द्वारा दक्षयज्ञका विध्वंस, दक्षद्वारा किये हुए शिवसहस्रनामस्तोत्रसे संतुष्ट होकर महादेवजीका उन्हें वरदान देना तथा इस स्तोत्रकी महिमा
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श्लोक 184
श्लोक
12.284.184
अथैनमब्रवीद् वाक्यं लोकस्याधिपतिर्भव:।
आश्वासनकरं वाक्यं वाक्यविद्वाक्य सम्मतम्॥ १८४॥
अनुवाद
तत्पश्चात् वाक्यविशारद लोकनाथ भगवान शिव ने प्रजापति को सान्त्वना देते हुए एक बुद्धिमतापूर्ण और उत्तम वचन कहा-॥184॥
Thereafter Vakyavisharad, Lord Shiva of Loknath said a wise and excellent word consoling Prajapati -॥ 184॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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