सर्वभूतकरो यस्मात् सर्वभूतपतिर्हर:।
सर्वभूतान्तरात्मा च तेन त्वं न निमन्त्रित:॥ १७७॥
अनुवाद
आप ही सम्पूर्ण प्राणियों के रचयिता, रक्षक और संहारक हैं तथा सम्पूर्ण प्राणियों के अन्तर्यामी भी आप ही हैं, इसीलिए मैंने आपको पृथक् आमंत्रित नहीं किया॥177॥
You are the creator, protector and destroyer of all beings; and you are the inner soul of all beings. That is why I did not invite you separately.॥ 177॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥