ये न रोदन्ति देहस्था देहिनो रोदयन्ति च।
हर्षयन्ति न हृष्यन्ति नमस्तेभ्योऽस्तु नित्यश:॥ १७१॥
अनुवाद
मैं उन सम्पूर्ण रुद्रों को सदैव नमस्कार करता हूँ जो शरीर में रहते हुए भी स्वयं नहीं रोते, अपितु देहधारियों को रुलाते हैं तथा स्वयं सुखी न होकर दूसरों को सुखी करते हैं ॥171॥
I always salute all those Rudras who, while residing in the body, do not cry themselves but make the embodied beings cry, and who, instead of being happy themselves, make the others happy. ॥ 171॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥