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mahabharat 12.284.170: वह जो समस्त देहधारियों के भीतर अंगूठे के आकार के प्राणी के रूप में निवास करते हैं, सदैव मेरी रक्षा करें तथा मुझे समृद्ध करें।   |   mahabharat अध्याय 12.284: पार्वतीके रोष एवं खेदका निवारण करनेके लिये भगवान् शिवके द्वारा दक्षयज्ञका विध्वंस, दक्षद्वारा किये हुए शिवसहस्रनामस्तोत्रसे संतुष्ट होकर महादेवजीका उन्हें वरदान देना तथा इस स्तोत्रकी महिमा   ।   mahabharat पर्व 12: शान्ति पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 12: शान्ति पर्व  »  अध्याय 284: पार्वतीके रोष एवं खेदका निवारण करनेके लिये भगवान् शिवके द्वारा दक्षयज्ञका विध्वंस, दक्षद्वारा किये हुए शिवसहस्रनामस्तोत्रसे संतुष्ट होकर महादेवजीका उन्हें वरदान देना तथा इस स्तोत्रकी महिमा  »  श्लोक 170
 
 
श्लोक  12.284.170 
येऽङ्गुष्ठमात्रा: पुरुषा देहस्था: सर्वदेहिनाम्।
रक्षन्तु ते हि मां नित्यं नित्यं चाप्याययन्तु माम्॥ १७०॥
 
 
अनुवाद
वह जो समस्त देहधारियों के भीतर अंगूठे के आकार के प्राणी के रूप में निवास करते हैं, सदैव मेरी रक्षा करें तथा मुझे समृद्ध करें।
 
May He, who resides within all embodied beings in the form of a thumb-sized creature, always protect and prosper me.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)