श्री महाभारत  »  पर्व 12: शान्ति पर्व  »  अध्याय 284: पार्वतीके रोष एवं खेदका निवारण करनेके लिये भगवान् शिवके द्वारा दक्षयज्ञका विध्वंस, दक्षद्वारा किये हुए शिवसहस्रनामस्तोत्रसे संतुष्ट होकर महादेवजीका उन्हें वरदान देना तथा इस स्तोत्रकी महिमा  »  श्लोक 169
 
 
श्लोक  12.284.169 
ये चानुपतिता गर्भा यथा भागानुपासते।
नमस्तेभ्य: स्वधा स्वाहा प्राप्नुवन्तु मुदन्तु ते॥ १६९॥
 
 
अनुवाद
ब्रह्माजी के बाद उत्पन्न हुए देवताओं और पितरों को नमस्कार है, जो बालकों के समान यज्ञ में अपना-अपना भाग ग्रहण करते हैं। वे 'स्वाहा और स्वधा' द्वारा अपना भाग ग्रहण करके प्रसन्न हों॥169॥
 
Salutations to the gods and ancestors who were born after Brahma and who receive their respective shares in the sacrifice like children. May they be happy on receiving their shares by 'Swaha and Swadha'.॥ 169॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)