श्री महाभारत  »  पर्व 12: शान्ति पर्व  »  अध्याय 284: पार्वतीके रोष एवं खेदका निवारण करनेके लिये भगवान् शिवके द्वारा दक्षयज्ञका विध्वंस, दक्षद्वारा किये हुए शिवसहस्रनामस्तोत्रसे संतुष्ट होकर महादेवजीका उन्हें वरदान देना तथा इस स्तोत्रकी महिमा  »  श्लोक 167
 
 
श्लोक  12.284.167 
सम्भक्ष्य सर्वभूतानि युगान्ते पर्युपस्थिते।
य: शेते जलमध्यस्थस्तं प्रपद्येऽम्बुशायिनम्॥ १६७॥
 
 
अनुवाद
मैं उस प्रभु की शरण लेता हूँ जो प्रलयकाल में सम्पूर्ण प्राणियों का संहार करके समुद्र के जल में विश्राम करते हैं ॥167॥
 
I take refuge in that Lord who, after killing all living beings at the time of doomsday, rests in the water of the ocean. ॥167॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)