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श्री महाभारत
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पर्व 12: शान्ति पर्व
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अध्याय 284: पार्वतीके रोष एवं खेदका निवारण करनेके लिये भगवान् शिवके द्वारा दक्षयज्ञका विध्वंस, दक्षद्वारा किये हुए शिवसहस्रनामस्तोत्रसे संतुष्ट होकर महादेवजीका उन्हें वरदान देना तथा इस स्तोत्रकी महिमा
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श्लोक 166
श्लोक
12.284.166
यस्य केशेषु जीमूता नद्य: सर्वाङ्गसंधिषु।
कुक्षौ समुद्राश्चत्वारस्तस्मै तोयात्मने नम:॥ १६६॥
अनुवाद
जिनके केशों में बादल, शरीर के जोड़ों में नदियाँ और उदर में चारों समुद्र स्थित हैं, उन जलरूपी परमेश्वर को नमस्कार है ॥166॥
Salutations to that water-like Supreme Being who has clouds in his hair, rivers in the joints of his body and the four oceans in his stomach. ॥166॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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