श्री महाभारत  »  पर्व 12: शान्ति पर्व  »  अध्याय 284: पार्वतीके रोष एवं खेदका निवारण करनेके लिये भगवान् शिवके द्वारा दक्षयज्ञका विध्वंस, दक्षद्वारा किये हुए शिवसहस्रनामस्तोत्रसे संतुष्ट होकर महादेवजीका उन्हें वरदान देना तथा इस स्तोत्रकी महिमा  »  श्लोक 161
 
 
श्लोक  12.284.161 
या मूर्तय: सुसूक्ष्मास्ते न मह्यं यान्ति दर्शनम्।
त्राहि मां सततं रक्ष पिता पुत्रमिवौरसम्॥ १६१॥
 
 
अनुवाद
आपके सूक्ष्म रूप हमें अदृश्य हैं। हे प्रभु! जैसे पिता अपने पुत्र की रक्षा करता है, वैसे ही आप मेरी भी सदैव रक्षा करें॥161॥
 
Your subtle forms are invisible to us. O Lord! Just as a father protects his own son, in the same way please protect me always.॥ 161॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)