श्री महाभारत  »  पर्व 12: शान्ति पर्व  »  अध्याय 284: पार्वतीके रोष एवं खेदका निवारण करनेके लिये भगवान् शिवके द्वारा दक्षयज्ञका विध्वंस, दक्षद्वारा किये हुए शिवसहस्रनामस्तोत्रसे संतुष्ट होकर महादेवजीका उन्हें वरदान देना तथा इस स्तोत्रकी महिमा  »  श्लोक 160
 
 
श्लोक  12.284.160 
न ब्रह्मा न च गोविन्द: पौराणा ऋषयो न ते।
माहात्म्यं वेदितुं शक्ता याथातथ्येन ते शिव॥ १६०॥
 
 
अनुवाद
हे शिव! ब्रह्मा, विष्णु तथा प्राचीन ऋषिगण भी आपके माहात्म्य को ठीक से समझने में समर्थ नहीं हैं ॥160॥
 
Shiva! Even Brahma, Vishnu and the ancient sages are not capable of understanding your greatness properly. ॥ 160॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)