Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 12.284.16-17: यह स्मरण होते ही दधीचि यज्ञस्थल छोड़कर दूर चले गए और बोले - 'सज्जनों! पूजनीय महापुरुष की पूजा न करके, अपूज्य पुरुष की पूजा करके मनुष्य सदैव हत्या के समान पाप को प्राप्त होता है॥ 16-17॥ | mahabharat अध्याय 12.284: पार्वतीके रोष एवं खेदका निवारण करनेके लिये भगवान् शिवके द्वारा दक्षयज्ञका विध्वंस, दक्षद्वारा किये हुए शिवसहस्रनामस्तोत्रसे संतुष्ट होकर महादेवजीका उन्हें वरदान देना तथा इस स्तोत्रकी महिमा । mahabharat पर्व 12: शान्ति पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
यह स्मरण होते ही दधीचि यज्ञस्थल छोड़कर दूर चले गए और बोले - 'सज्जनों! पूजनीय महापुरुष की पूजा न करके, अपूज्य पुरुष की पूजा करके मनुष्य सदैव हत्या के समान पाप को प्राप्त होता है॥ 16-17॥
As soon as Dadhichi remembered this, he left the place where the sacrifice was being held and went far away and said, 'Gentlemen! By worshipping an unworshipable person and not worshipping a great man who is worthy of worship, a man always incurs the same sin as murder.॥ 16-17॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥