श्री महाभारत  »  पर्व 12: शान्ति पर्व  »  अध्याय 284: पार्वतीके रोष एवं खेदका निवारण करनेके लिये भगवान् शिवके द्वारा दक्षयज्ञका विध्वंस, दक्षद्वारा किये हुए शिवसहस्रनामस्तोत्रसे संतुष्ट होकर महादेवजीका उन्हें वरदान देना तथा इस स्तोत्रकी महिमा  »  श्लोक 159
 
 
श्लोक  12.284.159 
महोदधि: सरस्वती वाग् बलमनलो-
ऽनिल:अहोरात्रं निमेषोन्मेषकर्म॥ १५९॥
 
 
अनुवाद
आप समुद्र हैं, सरस्वती आपकी वाणी हैं, अग्नि और वायु आपकी शक्ति हैं और आपके नेत्रों का खुलना और बंद होना ही दिन और रात है। 159।
 
You are the ocean, Saraswati is your speech, fire and wind are your strength and the opening and closing of your eyes is day and night. 159.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)