Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 12.284.154-155: आप ही मेरे यज्ञरूपी मृग को मारने वाले, रोगों को लाने वाले और उनका निवारण करने वाले हैं। (कृष्णरूप में) आप ही शिखंडी हैं, क्योंकि आपने अपने सिर पर शिखंडी (मोर पंख) धारण किया है। आप ही कमल के समान नेत्रों वाले, कमलवन में निवास करने वाले, दण्डधारी, त्र्यम्बक, उग्रदण्ड और जगत् के संहारक हैं। आप ही विषैली अग्नि को पीने वाले, देवताओं में श्रेष्ठ, सोमरस का पान करने वाले और मरुभूमि के स्वामी हैं। 154-155॥ | mahabharat अध्याय 12.284: पार्वतीके रोष एवं खेदका निवारण करनेके लिये भगवान् शिवके द्वारा दक्षयज्ञका विध्वंस, दक्षद्वारा किये हुए शिवसहस्रनामस्तोत्रसे संतुष्ट होकर महादेवजीका उन्हें वरदान देना तथा इस स्तोत्रकी महिमा । mahabharat पर्व 12: शान्ति पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
आप ही मेरे यज्ञरूपी मृग को मारने वाले, रोगों को लाने वाले और उनका निवारण करने वाले हैं। (कृष्णरूप में) आप ही शिखंडी हैं, क्योंकि आपने अपने सिर पर शिखंडी (मोर पंख) धारण किया है। आप ही कमल के समान नेत्रों वाले, कमलवन में निवास करने वाले, दण्डधारी, त्र्यम्बक, उग्रदण्ड और जगत् के संहारक हैं। आप ही विषैली अग्नि को पीने वाले, देवताओं में श्रेष्ठ, सोमरस का पान करने वाले और मरुभूमि के स्वामी हैं। 154-155॥
You are the one who kills my sacrificial deer and brings and cures the diseases. (In the form of Krishna) you are Shikhandi because of wearing Shikhandi (peacock feather) on your head. You are the one with lotus like eyes, resident in the lotus forest, wielder of the stick, Trimbak, Ugradanda and the destroyer of the universe. He is the one who drinks poisonous fire, is the best among gods, who drinks Somra and is the lord of deserts. 154-155॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥