Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 12.284.147: आप ही दीक्षित (यज्ञ की दीक्षा लेने वाले), दीक्षित न होने वाले, क्षमा करने वाले, दुष्ट और दुराचारी प्राणियों का नाश करने वाले, चंद्रमाओं (महीनों) को दोहराने वाले, युगों (कल्पों) को दोहराने वाले, संवर्त (प्रलय) और संप्रवर्तक (सृष्टि को पुनः प्रारंभ करने वाले) भी हैं॥147॥ | mahabharat अध्याय 12.284: पार्वतीके रोष एवं खेदका निवारण करनेके लिये भगवान् शिवके द्वारा दक्षयज्ञका विध्वंस, दक्षद्वारा किये हुए शिवसहस्रनामस्तोत्रसे संतुष्ट होकर महादेवजीका उन्हें वरदान देना तथा इस स्तोत्रकी महिमा । mahabharat पर्व 12: शान्ति पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
आप ही दीक्षित (यज्ञ की दीक्षा लेने वाले), दीक्षित न होने वाले, क्षमा करने वाले, दुष्ट और दुराचारी प्राणियों का नाश करने वाले, चंद्रमाओं (महीनों) को दोहराने वाले, युगों (कल्पों) को दोहराने वाले, संवर्त (प्रलय) और संप्रवर्तक (सृष्टि को पुनः प्रारंभ करने वाले) भी हैं॥147॥
You are also the one who is Dixit (the one who takes the initiation of Yagya), the one who is uninitiated, the one who forgives, the one who destroys evil and unruly creatures, the one who repeats the moon (months), the one who repeats the eras (kalpa), the Samvarta (doomsday) and the Sampravartak (the one who starts the creation again). 147॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥