श्री महाभारत  »  पर्व 12: शान्ति पर्व  »  अध्याय 284: पार्वतीके रोष एवं खेदका निवारण करनेके लिये भगवान् शिवके द्वारा दक्षयज्ञका विध्वंस, दक्षद्वारा किये हुए शिवसहस्रनामस्तोत्रसे संतुष्ट होकर महादेवजीका उन्हें वरदान देना तथा इस स्तोत्रकी महिमा  »  श्लोक 144
 
 
श्लोक  12.284.144 
स्वाहा स्वधा वषट्कारो नमस्कारो नमो नम:।
गूढव्रतो गुह्यतपास्तारकस्तारकामय:॥ १४४॥
 
 
अनुवाद
स्वाहा, स्वधा, वषट्-नमस्कार और नमो नमः आदि आपके नाम हैं। आप गूढ़ व्रतों का पालन करने वाले, गुप्त तप करने वाले, तारक मंत्र वाले और तारों से युक्त आकाश वाले हैं॥144॥
 
Swaha, Swadha, Vashat-namaskar and Namo Namah etc. are Your names. You are the one who observes esoteric vows, who performs secret penances, the Taraka mantra and the sky filled with stars.॥ 144॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)