Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 12.284.141: चारों युग और चारों वेद आपके ही स्वरूप हैं और आप ही चार प्रकार के होत्रिय अनुष्ठानों के प्रवर्तक हैं। आप ही चारों आश्रमों के अधिपति और चारों वर्णों के रचयिता हैं॥141॥ | mahabharat अध्याय 12.284: पार्वतीके रोष एवं खेदका निवारण करनेके लिये भगवान् शिवके द्वारा दक्षयज्ञका विध्वंस, दक्षद्वारा किये हुए शिवसहस्रनामस्तोत्रसे संतुष्ट होकर महादेवजीका उन्हें वरदान देना तथा इस स्तोत्रकी महिमा । mahabharat पर्व 12: शान्ति पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
चतुर्युगश्चतुर्वेदश्चातुर्होत्रप्रवर्तक:।
चातुराश्रम्यनेता च चातुर्वर्ण्यकरश्च य:॥ १४१॥
अनुवाद
चारों युग और चारों वेद आपके ही स्वरूप हैं और आप ही चार प्रकार के होत्रिय अनुष्ठानों के प्रवर्तक हैं। आप ही चारों आश्रमों के अधिपति और चारों वर्णों के रचयिता हैं॥141॥
The four yugas and the four Vedas are your manifestations and you are the originator of the four types of Hotri rituals. You are the leader of the four ashramas and the creator of the four varnas.॥ 141॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥