श्री महाभारत  »  पर्व 12: शान्ति पर्व  »  अध्याय 284: पार्वतीके रोष एवं खेदका निवारण करनेके लिये भगवान् शिवके द्वारा दक्षयज्ञका विध्वंस, दक्षद्वारा किये हुए शिवसहस्रनामस्तोत्रसे संतुष्ट होकर महादेवजीका उन्हें वरदान देना तथा इस स्तोत्रकी महिमा  »  श्लोक 141
 
 
श्लोक  12.284.141 
चतुर्युगश्चतुर्वेदश्चातुर्होत्रप्रवर्तक:।
चातुराश्रम्यनेता च चातुर्वर्ण्यकरश्च य:॥ १४१॥
 
 
अनुवाद
चारों युग और चारों वेद आपके ही स्वरूप हैं और आप ही चार प्रकार के होत्रिय अनुष्ठानों के प्रवर्तक हैं। आप ही चारों आश्रमों के अधिपति और चारों वर्णों के रचयिता हैं॥141॥
 
The four yugas and the four Vedas are your manifestations and you are the originator of the four types of Hotri rituals. You are the leader of the four ashramas and the creator of the four varnas.॥ 141॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)