श्री महाभारत  »  पर्व 12: शान्ति पर्व  »  अध्याय 284: पार्वतीके रोष एवं खेदका निवारण करनेके लिये भगवान् शिवके द्वारा दक्षयज्ञका विध्वंस, दक्षद्वारा किये हुए शिवसहस्रनामस्तोत्रसे संतुष्ट होकर महादेवजीका उन्हें वरदान देना तथा इस स्तोत्रकी महिमा  »  श्लोक 13
 
 
श्लोक  12.284.13 
किंनु मोहान्न पश्यन्ति विनाशं पर्युपस्थितम्।
उपस्थितं महाघोरं न बुध्यन्ति महाध्वरे॥ १३॥
 
 
अनुवाद
इस महायज्ञ में भयंकर विनाश होने वाला है; परंतु आसक्ति के कारण कोई उसे देख नहीं रहा है - समझ नहीं पा रहा है।॥13॥
 
'In this great sacrifice, a terrible destruction is going to take place; but due to attachment, no one is seeing it - they are unable to understand it.'॥ 13॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)