श्री महाभारत  »  पर्व 12: शान्ति पर्व  »  अध्याय 284: पार्वतीके रोष एवं खेदका निवारण करनेके लिये भगवान् शिवके द्वारा दक्षयज्ञका विध्वंस, दक्षद्वारा किये हुए शिवसहस्रनामस्तोत्रसे संतुष्ट होकर महादेवजीका उन्हें वरदान देना तथा इस स्तोत्रकी महिमा  »  श्लोक 122
 
 
श्लोक  12.284.122 
ब्राह्मणा: क्षत्रिया वैश्या: शूद्रा वर्णावराश्च ये।
त्वमेव मेघसंघाश्च विद्युत्स्तनितगर्जित:॥ १२२॥
 
 
अनुवाद
ब्राह्मण, क्षत्रिय, वैश्य, शूद्र और अन्त्यज - ये सब आपके ही स्वरूप हैं। मेघ, बिजली, गर्जना और गड़गड़ाहट भी आप ही हैं॥122॥
 
The Brahmins, the Kshatriyas, the Vaishyas, the Shudras and the Antyajs—these are Your manifestations. The clouds, the lightning, the thunder and the rumbling are also You.॥122॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)