श्री महाभारत  »  पर्व 12: शान्ति पर्व  »  अध्याय 284: पार्वतीके रोष एवं खेदका निवारण करनेके लिये भगवान् शिवके द्वारा दक्षयज्ञका विध्वंस, दक्षद्वारा किये हुए शिवसहस्रनामस्तोत्रसे संतुष्ट होकर महादेवजीका उन्हें वरदान देना तथा इस स्तोत्रकी महिमा  »  श्लोक 121
 
 
श्लोक  12.284.121 
यजुर्मयो ऋङ्मयश्च त्वमाहुतिमयस्तथा।
पठॺसे स्तुतिभिश्चैव वेदोपनिषदां गणै:॥ १२१॥
 
 
अनुवाद
यजुर्वेद और ऋग्वेद आपके ही स्वरूप हैं। आप ही अर्पण हैं। वेद और उपनिषद् अपनी स्तुतियों द्वारा आपकी महानता का बखान करते हैं॥121॥
 
The Yajur Veda and the Rig Veda are Your manifestations. You are the offering. The Vedas and the Upanishads through their praises proclaim Your greatness.॥ 121॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)