श्री महाभारत  »  पर्व 12: शान्ति पर्व  »  अध्याय 284: पार्वतीके रोष एवं खेदका निवारण करनेके लिये भगवान् शिवके द्वारा दक्षयज्ञका विध्वंस, दक्षद्वारा किये हुए शिवसहस्रनामस्तोत्रसे संतुष्ट होकर महादेवजीका उन्हें वरदान देना तथा इस स्तोत्रकी महिमा  »  श्लोक 117
 
 
श्लोक  12.284.117 
जरायुजाण्डजाश्चैव स्वेदजाश्च तथोद्भिजा:।
त्वमेव देवदेवेश भूतग्रामश्चतुर्विध:॥ ११७॥
 
 
अनुवाद
हे देवों के देव! आप चार प्रकार के प्राणी हैं - सजीव, अण्डज, पसीना उत्पन्न करने वाले और वनस्पतिजन्य।
 
O Lord of lords! You are the four kinds of animals - viviparous, oviparous, sweating and plant-born.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)