Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7
mahabharat 12.284.112: आप कामनाओं के स्वरूप, कामनाओं को पूर्ण करने वाले, कामदेव का नाश करने वाले, तृप्त और अतृप्त का चिंतन करने वाले, सर्वस्वरूप, सर्वदाता, सर्वसंहारक तथा संध्या के समान वर्ण वाले हैं। मैं आपको नमस्कार करता हूँ।   |   mahabharat अध्याय 12.284: पार्वतीके रोष एवं खेदका निवारण करनेके लिये भगवान् शिवके द्वारा दक्षयज्ञका विध्वंस, दक्षद्वारा किये हुए शिवसहस्रनामस्तोत्रसे संतुष्ट होकर महादेवजीका उन्हें वरदान देना तथा इस स्तोत्रकी महिमा   ।   mahabharat पर्व 12: शान्ति पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 12: शान्ति पर्व  »  अध्याय 284: पार्वतीके रोष एवं खेदका निवारण करनेके लिये भगवान् शिवके द्वारा दक्षयज्ञका विध्वंस, दक्षद्वारा किये हुए शिवसहस्रनामस्तोत्रसे संतुष्ट होकर महादेवजीका उन्हें वरदान देना तथा इस स्तोत्रकी महिमा  »  श्लोक 112
 
 
श्लोक  12.284.112 
काम कामद कामघ्न तृप्तातृप्तविचारिणे।
सर्व सर्वद सर्वघ्न संध्याराग नमोऽस्तु ते॥ ११२॥
 
 
अनुवाद
आप कामनाओं के स्वरूप, कामनाओं को पूर्ण करने वाले, कामदेव का नाश करने वाले, तृप्त और अतृप्त का चिंतन करने वाले, सर्वस्वरूप, सर्वदाता, सर्वसंहारक तथा संध्या के समान वर्ण वाले हैं। मैं आपको नमस्कार करता हूँ।
 
You are the embodiment of desire, the fulfiller of desires, the destroyer of Kamadeva, the one who thinks of the satisfied and the unsatisfied, the form of everything, the giver of everything, the destroyer of all and are colored like the evening. I salute you.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)