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mahabharat 12.284.111: ईशान! आपका शरीर वज्र के समान कठोर है। हरिकेश! आपको नमस्कार है। हे व्यक्तरूप परमेश्वर! आप त्रिनेत्रधारी और अम्बिका के स्वामी हैं। आपको नमस्कार है॥111॥   |   mahabharat अध्याय 12.284: पार्वतीके रोष एवं खेदका निवारण करनेके लिये भगवान् शिवके द्वारा दक्षयज्ञका विध्वंस, दक्षद्वारा किये हुए शिवसहस्रनामस्तोत्रसे संतुष्ट होकर महादेवजीका उन्हें वरदान देना तथा इस स्तोत्रकी महिमा   ।   mahabharat पर्व 12: शान्ति पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 12: शान्ति पर्व  »  अध्याय 284: पार्वतीके रोष एवं खेदका निवारण करनेके लिये भगवान् शिवके द्वारा दक्षयज्ञका विध्वंस, दक्षद्वारा किये हुए शिवसहस्रनामस्तोत्रसे संतुष्ट होकर महादेवजीका उन्हें वरदान देना तथा इस स्तोत्रकी महिमा  »  श्लोक 111
 
 
श्लोक  12.284.111 
ईशान वज्रसंघात हरिकेश नमोऽस्तु ते।
त्र्यम्बकाम्बिकनाथाय व्यक्ताव्यक्त नमोऽस्तु ते॥ १११॥
 
 
अनुवाद
ईशान! आपका शरीर वज्र के समान कठोर है। हरिकेश! आपको नमस्कार है। हे व्यक्तरूप परमेश्वर! आप त्रिनेत्रधारी और अम्बिका के स्वामी हैं। आपको नमस्कार है॥111॥
 
Ishan! Your body is as hard as a thunderbolt. Harikesh! Salutations to you. Supreme God in the manifest form! You are three-eyed and the master of Ambika. Salutations to you.॥111॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)