श्री महाभारत  »  पर्व 12: शान्ति पर्व  »  अध्याय 284: पार्वतीके रोष एवं खेदका निवारण करनेके लिये भगवान् शिवके द्वारा दक्षयज्ञका विध्वंस, दक्षद्वारा किये हुए शिवसहस्रनामस्तोत्रसे संतुष्ट होकर महादेवजीका उन्हें वरदान देना तथा इस स्तोत्रकी महिमा  »  श्लोक 104
 
 
श्लोक  12.284.104 
सहस्रोद्यतशूलाय सहस्रनयनाय च।
नमो बालार्कवर्णाय बालरूपधराय च॥ १०४॥
 
 
अनुवाद
आपके हजारों हाथों में हजारों भाले हैं। आपके हजारों नेत्र हैं। आपका शरीर प्रातःकालीन सूर्य के समान चमकता है। आप बालक का रूप धारण करते हैं। आपको नमस्कार है॥104॥
 
You hold thousands of spears in your thousands of hands. You have thousands of eyes. Your body glows like the morning sun. You take the form of a child. Salutations to you.॥104॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)