Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 12.284.103: आप अन्नदाता, अन्न के स्वामी और अन्न के भोक्ता हैं। आपके हजारों सिर और हजारों चरण हैं। मैं आपको बार-बार प्रणाम करता हूँ॥103॥ | mahabharat अध्याय 12.284: पार्वतीके रोष एवं खेदका निवारण करनेके लिये भगवान् शिवके द्वारा दक्षयज्ञका विध्वंस, दक्षद्वारा किये हुए शिवसहस्रनामस्तोत्रसे संतुष्ट होकर महादेवजीका उन्हें वरदान देना तथा इस स्तोत्रकी महिमा । mahabharat पर्व 12: शान्ति पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
आप अन्नदाता, अन्न के स्वामी और अन्न के भोक्ता हैं। आपके हजारों सिर और हजारों चरण हैं। मैं आपको बार-बार प्रणाम करता हूँ॥103॥
You are the giver of food, the lord of food and the consumer of food. You have thousands of heads and thousands of feet. I bow to you again and again.॥103॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥