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श्री महाभारत
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पर्व 12: शान्ति पर्व
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अध्याय 284: पार्वतीके रोष एवं खेदका निवारण करनेके लिये भगवान् शिवके द्वारा दक्षयज्ञका विध्वंस, दक्षद्वारा किये हुए शिवसहस्रनामस्तोत्रसे संतुष्ट होकर महादेवजीका उन्हें वरदान देना तथा इस स्तोत्रकी महिमा
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श्लोक 1
श्लोक
12.284.1
जनमेजय उवाच
प्राचेतसस्य दक्षस्य कथं वैवस्वतेऽन्तरे।
विनाशमगमद् ब्रह्मन् हयमेध: प्रजापते:॥ १॥
अनुवाद
जनमेजय ने पूछा- ब्रह्मन्! वैवस्वत मन्वंतर में प्रचेता के पुत्र दक्षप्रजापति का अश्वमेघ यज्ञ कैसे नष्ट हो गया था? 1॥
Janamejaya asked – Brahman! How was the Ashvamedha Yagya of Dakshprajapati, son of Prachetas, destroyed in Vaivasvata Manvantara? 1॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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