श्री महाभारत  »  पर्व 12: शान्ति पर्व  »  अध्याय 283: शिवजीद्वारा दक्षयज्ञका भंग और उनके क्रोधसे ज्वरकी उत्पत्ति तथा उसके विविध रूप  »  श्लोक 8-9
 
 
श्लोक  12.283.8-9 
तथा देवा महात्मानो वसवश्चामितौजस:।
तथैव च महात्मानावश्विनौ भिषजां वरौ।
तथा वैश्रवणो राजा गुह्यकैरभिसंवृत:॥ ८॥
यक्षाणामीश्वर: श्रीमान् कैलासनिलय: प्रभु:।
(शङ्खपद्मनिधिभ्यां च ऋद्धॺा परमया सह।)
उपासन्त महात्मानमुशना च महामुनि:॥ ९॥
 
 
अनुवाद
इसी प्रकार बहुत से महामनस्वी देवता, महातेजस्वी वसुगण, वैद्यों में श्रेष्ठ, महापुरुष अश्विनीकुमार, शंखनिधि, पद्मनिधि और श्रेष्ठ ऋद्धि, गुफाओं से घिरे हुए कैलाश के यक्षपति, सर्वशक्तिमान राजा कुबेर और महामुनि शुक्राचार्य - ये सभी भगवान महादेवजी की आराधना करते थे ॥8-9॥
 
Similarly, there were many great minded gods, the a lot of brilliant Vasugana, the best among physicians, the great man Ashwini Kumar, Shankhanidhi, Padmanidhi and the best Riddhi, the Yakshapati of Kailash surrounded by caves, the almighty king Kuber and the great sage Shukracharya - all of them used to worship Lord Mahadevji. 8-9॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)