श्री महाभारत  »  पर्व 12: शान्ति पर्व  »  अध्याय 283: शिवजीद्वारा दक्षयज्ञका भंग और उनके क्रोधसे ज्वरकी उत्पत्ति तथा उसके विविध रूप  »  श्लोक 61
 
 
श्लोक  12.283.61 
विष्णुभक्त्या हि तेनेदं जगद् व्याप्तमभूत् तदा।
तस्माच्च निहतो युद्धे विष्णो: स्थानमवाप्तवान्॥ ६१॥
 
 
अनुवाद
भगवान विष्णु की भक्ति के प्रभाव से उसने अपने विशाल शरीर से सम्पूर्ण जगत को आच्छादित कर लिया था, अतः युद्ध में मारा जाने पर वह विष्णुधाम को प्राप्त हुआ ॥61॥
 
Due to the influence of his devotion to Lord Vishnu, he had covered the entire world with his huge body. Hence, after being killed in the war, he attained Vishnudham. 61॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)