Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7
mahabharat 12.283.55: हमने सुना है कि सभी भेड़ों का पित्त भी ज्वर है। सभी तोतों के लिए हिचकी ज्वर मानी जाती है ॥55॥   |   mahabharat अध्याय 12.283: शिवजीद्वारा दक्षयज्ञका भंग और उनके क्रोधसे ज्वरकी उत्पत्ति तथा उसके विविध रूप   ।   mahabharat पर्व 12: शान्ति पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 12: शान्ति पर्व  »  अध्याय 283: शिवजीद्वारा दक्षयज्ञका भंग और उनके क्रोधसे ज्वरकी उत्पत्ति तथा उसके विविध रूप  »  श्लोक 55
 
 
श्लोक  12.283.55 
अवीनां पित्तभेदश्च सर्वेषामिति न: श्रुतम्।
शुकानामपि सर्वेषां हिक्किका प्रोच्यते ज्वर:॥ ५५॥
 
 
अनुवाद
हमने सुना है कि सभी भेड़ों का पित्त भी ज्वर है। सभी तोतों के लिए हिचकी ज्वर मानी जाती है ॥55॥
 
We have heard that the bile of all sheep is also a fever. For all parrots, hiccups are considered to be fever. ॥ 55॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)