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mahabharat 12.283.46: हे शत्रुओं को पीड़ा देने वाले महादेव! आपके क्रोध से समस्त देवता और ऋषिगण पीड़ित हैं और उन्हें कहीं भी शांति नहीं मिल रही है॥ 46॥   |   mahabharat अध्याय 12.283: शिवजीद्वारा दक्षयज्ञका भंग और उनके क्रोधसे ज्वरकी उत्पत्ति तथा उसके विविध रूप   ।   mahabharat पर्व 12: शान्ति पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 12: शान्ति पर्व  »  अध्याय 283: शिवजीद्वारा दक्षयज्ञका भंग और उनके क्रोधसे ज्वरकी उत्पत्ति तथा उसके विविध रूप  »  श्लोक 46
 
 
श्लोक  12.283.46 
इमा हि देवता: सर्वा ऋषयश्च परंतप।
तव क्रोधान्महादेव न शान्तिमुपलेभिरे॥ ४६॥
 
 
अनुवाद
हे शत्रुओं को पीड़ा देने वाले महादेव! आपके क्रोध से समस्त देवता और ऋषिगण पीड़ित हैं और उन्हें कहीं भी शांति नहीं मिल रही है॥ 46॥
 
O Mahadeva, who torments the enemies! All the gods and sages are tormented by your anger and are unable to find peace anywhere. ॥ 46॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)