श्री महाभारत  »  पर्व 12: शान्ति पर्व  »  अध्याय 283: शिवजीद्वारा दक्षयज्ञका भंग और उनके क्रोधसे ज्वरकी उत्पत्ति तथा उसके विविध रूप  »  श्लोक 45
 
 
श्लोक  12.283.45 
ब्रह्मोवाच
भवतोऽपि सुरा: सर्वे भागं दास्यन्ति वै प्रभो।
क्रियतां प्रतिसंहार: सर्वदेवेश्वर त्वया॥ ४५॥
 
 
अनुवाद
ब्रह्माजी ने कहा- हे देवों के स्वामी! अब आप अपना क्रोध शांत कीजिए। आज से सभी देवता आपको यज्ञों में भाग देंगे।॥45॥
 
Brahmaji said- O Lord of all gods! Now calm down your anger. From today onwards all the gods will give you a share in the sacrifices. ॥ 45॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)