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mahabharat 12.283.44: उस समय सम्पूर्ण जगत् में त्राहि-त्राहि मची हुई थी। यह सब देखकर ब्रह्माजी ने महादेवजी को जगत् की दुर्दशा दिखाई और उनसे इस प्रकार कहा॥44॥   |   mahabharat अध्याय 12.283: शिवजीद्वारा दक्षयज्ञका भंग और उनके क्रोधसे ज्वरकी उत्पत्ति तथा उसके विविध रूप   ।   mahabharat पर्व 12: शान्ति पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 12: शान्ति पर्व  »  अध्याय 283: शिवजीद्वारा दक्षयज्ञका भंग और उनके क्रोधसे ज्वरकी उत्पत्ति तथा उसके विविध रूप  »  श्लोक 44
 
 
श्लोक  12.283.44 
हाहाभूतं जगत‍् सर्वमुपलक्ष्य तदा प्रभु:।
पितामहो महादेवं दर्शयन् प्रत्यभाषत॥ ४४॥
 
 
अनुवाद
उस समय सम्पूर्ण जगत् में त्राहि-त्राहि मची हुई थी। यह सब देखकर ब्रह्माजी ने महादेवजी को जगत् की दुर्दशा दिखाई और उनसे इस प्रकार कहा॥44॥
 
At that time the whole world was in turmoil. Seeing all this, Lord Brahma showed Mahadevji the plight of the world and said to him as follows. ॥ 44॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)