श्री महाभारत  »  पर्व 12: शान्ति पर्व  »  अध्याय 283: शिवजीद्वारा दक्षयज्ञका भंग और उनके क्रोधसे ज्वरकी उत्पत्ति तथा उसके विविध रूप  »  श्लोक 42
 
 
श्लोक  12.283.42 
व्यचरत् सर्वतो देवान् प्राद्रवत् स ऋषींस्तथा।
देवाश्चाप्याद्रवन् सर्वे ततो भीता दिशो दश॥ ४२॥
 
 
अनुवाद
तत्पश्चात् वह पुरुष सर्वत्र भटकता हुआ देवताओं और ऋषियों की ओर दौड़ा और उसे देखकर समस्त देवता भयभीत होकर दसों दिशाओं में भाग गए ॥ 42॥
 
Thereafter the man started wandering everywhere and ran towards the gods and sages. Seeing him all the gods got frightened and fled in all the ten directions. ॥ 42॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)