श्री महाभारत  »  पर्व 12: शान्ति पर्व  »  अध्याय 283: शिवजीद्वारा दक्षयज्ञका भंग और उनके क्रोधसे ज्वरकी उत्पत्ति तथा उसके विविध रूप  »  श्लोक 4
 
 
श्लोक  12.283.4 
भीष्म उवाच
शृणु राजन् ज्वरस्येमं सम्भवं लोकविश्रुतम्।
विस्तरं चास्य वक्ष्यामि यादृशश्चैव भारत॥ ४॥
 
 
अनुवाद
भीष्म बोले, 'हे राजन! ज्वर की उत्पत्ति की यह कथा समस्त लोकों में प्रसिद्ध है। इसे सुनो। हे भरत! मैं तुम्हें विस्तारपूर्वक यह घटना सुनाता हूँ।'
 
Bhishma said, 'O King! This story of the origin of fever is famous in all the worlds. Listen to it. O Bharata! I am telling you in detail as to what this incident is.'
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)