Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7
mahabharat 12.283.36-37h: जब भगवान शिव ने यज्ञ को हिरण का रूप धारण करके भागते देखा, तो उन्होंने अपना धनुष हाथ में लिया और बाणों से उसका पीछा किया।   |   mahabharat अध्याय 12.283: शिवजीद्वारा दक्षयज्ञका भंग और उनके क्रोधसे ज्वरकी उत्पत्ति तथा उसके विविध रूप   ।   mahabharat पर्व 12: शान्ति पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 12: शान्ति पर्व  »  अध्याय 283: शिवजीद्वारा दक्षयज्ञका भंग और उनके क्रोधसे ज्वरकी उत्पत्ति तथा उसके विविध रूप  »  श्लोक 36-37h
 
 
श्लोक  12.283.36-37h 
तं तु यज्ञं तथारूपं गच्छन्तमुपलभ्य स:॥ ३६॥
धनुरादाय बाणेन तदान्वसरत प्रभु:।
 
 
अनुवाद
जब भगवान शिव ने यज्ञ को हिरण का रूप धारण करके भागते देखा, तो उन्होंने अपना धनुष हाथ में लिया और बाणों से उसका पीछा किया।
 
When Lord Shiva saw Yajna fleeing in the form of a deer, he took his bow in his hand and chased him with his arrows. 36 1/2
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)