Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7
mahabharat 12.283.35-36h: हे मनुष्यों के स्वामी! जब उन पर चारों ओर से आक्रमण होने लगा, तब बलि ने मृग का रूप धारण किया और आकाश की ओर भाग गए।   |   mahabharat अध्याय 12.283: शिवजीद्वारा दक्षयज्ञका भंग और उनके क्रोधसे ज्वरकी उत्पत्ति तथा उसके विविध रूप   ।   mahabharat पर्व 12: शान्ति पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 12: शान्ति पर्व  »  अध्याय 283: शिवजीद्वारा दक्षयज्ञका भंग और उनके क्रोधसे ज्वरकी उत्पत्ति तथा उसके विविध रूप  »  श्लोक 35-36h
 
 
श्लोक  12.283.35-36h 
तत: स यज्ञो नृपते वध्यमान: समन्तत:॥ ३५॥
आस्थाय मृगरूपं वै खमेवाभ्यगमत् तदा।
 
 
अनुवाद
हे मनुष्यों के स्वामी! जब उन पर चारों ओर से आक्रमण होने लगा, तब बलि ने मृग का रूप धारण किया और आकाश की ओर भाग गए।
 
O lord of men! When he was being attacked from all sides, then the sacrifice took the form of a deer and ran away towards the sky. 35 1/2
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)