Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 12.283.32-33h: तत्पश्चात् समस्त योगेश्वरों के स्वामी, परम तेजस्वी देवाधिदेव, पिनाकधारी शिवजी ने योगबल का आश्रय लेकर अपने भयंकर सेवकों की सहायता से उस यज्ञ का अचानक विध्वंस कर दिया॥32 1/2॥ | mahabharat अध्याय 12.283: शिवजीद्वारा दक्षयज्ञका भंग और उनके क्रोधसे ज्वरकी उत्पत्ति तथा उसके विविध रूप । mahabharat पर्व 12: शान्ति पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
ततो योगबलं कृत्वा सर्वयोगेश्वरेश्वर:।
तं यज्ञं स महातेजा भीमैरनुचरैस्तदा॥ ३२॥
सहसा घातयामास देवदेव: पिनाकधृक्।
अनुवाद
तत्पश्चात् समस्त योगेश्वरों के स्वामी, परम तेजस्वी देवाधिदेव, पिनाकधारी शिवजी ने योगबल का आश्रय लेकर अपने भयंकर सेवकों की सहायता से उस यज्ञ का अचानक विध्वंस कर दिया॥32 1/2॥
Thereafter, the Lord of all the Yogeshwaras, the most brilliant Devadhidev, pinak-wearing Shiva, taking the help of the power of Yoga, suddenly destroyed that yagya with the help of his terrible servants. 32 1/2॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥