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mahabharat 12.283.31: देवी पार्वती के मन की बात और उनकी इच्छा जानकर महादेव ने नंदी को वहीं खड़े रहने का आदेश दिया ॥31॥   |   mahabharat अध्याय 12.283: शिवजीद्वारा दक्षयज्ञका भंग और उनके क्रोधसे ज्वरकी उत्पत्ति तथा उसके विविध रूप   ।   mahabharat पर्व 12: शान्ति पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
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श्लोक  12.283.31 
अथ देव्या मतं ज्ञात्वा हृद्‍गतं यच्चिकीर्षितम्।
स समाज्ञापयामास तिष्ठ त्वमिति नन्दिनम्॥ ३१॥
 
 
अनुवाद
देवी पार्वती के मन की बात और उनकी इच्छा जानकर महादेव ने नंदी को वहीं खड़े रहने का आदेश दिया ॥31॥
 
Knowing what was in Goddess Parvati's mind and what she wanted to do, Mahadeva ordered Nandi to stand there. ॥ 31॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)