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mahabharat 12.283.30: भीष्मजी कहते हैं - राजन ! अपने पति भगवान पशुपति से ऐसा कहकर पार्वती देवी चुप हो गईं, परंतु उनका हृदय शोक से जल रहा था ॥30॥   |   mahabharat अध्याय 12.283: शिवजीद्वारा दक्षयज्ञका भंग और उनके क्रोधसे ज्वरकी उत्पत्ति तथा उसके विविध रूप   ।   mahabharat पर्व 12: शान्ति पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 12: शान्ति पर्व  »  अध्याय 283: शिवजीद्वारा दक्षयज्ञका भंग और उनके क्रोधसे ज्वरकी उत्पत्ति तथा उसके विविध रूप  »  श्लोक 30
 
 
श्लोक  12.283.30 
भीष्म उवाच
एवमुक्त्वा तु सा देवी तदा पशुपतिं पतिम्।
तूष्णींभूताभवद् राजन् दह्यमानेन चेतसा॥ ३०॥
 
 
अनुवाद
भीष्मजी कहते हैं - राजन ! अपने पति भगवान पशुपति से ऐसा कहकर पार्वती देवी चुप हो गईं, परंतु उनका हृदय शोक से जल रहा था ॥30॥
 
Bhishmaji says – King! Saying this to her husband Lord Pashupati, Parvati Devi became silent, but her heart was burning with grief. 30॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)