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mahabharat 12.283.27: सुन्दर! पूर्वनिर्धारित नियम के अनुसार धर्म की दृष्टि से देवता मुझे यज्ञ में भाग नहीं देते॥27॥   |   mahabharat अध्याय 12.283: शिवजीद्वारा दक्षयज्ञका भंग और उनके क्रोधसे ज्वरकी उत्पत्ति तथा उसके विविध रूप   ।   mahabharat पर्व 12: शान्ति पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 12: शान्ति पर्व  »  अध्याय 283: शिवजीद्वारा दक्षयज्ञका भंग और उनके क्रोधसे ज्वरकी उत्पत्ति तथा उसके विविध रूप  »  श्लोक 27
 
 
श्लोक  12.283.27 
पूर्वोपायोपपन्नेन मार्गेण वरवर्णिनि।
न मे सुरा: प्रयच्छन्ति भागं यज्ञस्य धर्मत:॥ २७॥
 
 
अनुवाद
सुन्दर! पूर्वनिर्धारित नियम के अनुसार धर्म की दृष्टि से देवता मुझे यज्ञ में भाग नहीं देते॥27॥
 
Beautiful! According to the predetermined rule, from the point of view of religion, the gods do not offer me a part in the yagya. 27॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)