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mahabharat 12.283.22: देवताओं को स्थापित होते देख सती साध्वी गिरिराजनंदिनी उमा ने अपने गुरु पशुपति महादेवजी से पूछा-॥ 22॥   |   mahabharat अध्याय 12.283: शिवजीद्वारा दक्षयज्ञका भंग और उनके क्रोधसे ज्वरकी उत्पत्ति तथा उसके विविध रूप   ।   mahabharat पर्व 12: शान्ति पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 12: शान्ति पर्व  »  अध्याय 283: शिवजीद्वारा दक्षयज्ञका भंग और उनके क्रोधसे ज्वरकी उत्पत्ति तथा उसके विविध रूप  »  श्लोक 22
 
 
श्लोक  12.283.22 
प्रस्थिता देवता दृष्ट्वा शैलराजसुता तदा।
उवाच वचनं साध्वी देवं पशुपतिं पतिम्॥ २२॥
 
 
अनुवाद
देवताओं को स्थापित होते देख सती साध्वी गिरिराजनंदिनी उमा ने अपने गुरु पशुपति महादेवजी से पूछा-॥ 22॥
 
Seeing the deities being established, Sati Sadhvi Girirajnandini Uma asked her master Pashupati Mahadevji -॥ 22॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)