श्री महाभारत  »  पर्व 12: शान्ति पर्व  »  अध्याय 283: शिवजीद्वारा दक्षयज्ञका भंग और उनके क्रोधसे ज्वरकी उत्पत्ति तथा उसके विविध रूप  »  श्लोक 21
 
 
श्लोक  12.283.21 
ते विमानैर्महात्मानो ज्वलनार्कसमप्रभै:।
देवस्यानुमतेऽगच्छन् गङ्गाद्वारमिति श्रुति:॥ २१॥
 
 
अनुवाद
हमने सुना है कि वे महाहृदयी देवता सूर्य और अग्नि के समान तेजस्वी विमानों पर बैठकर महादेवजी की अनुमति लेकर गंगाद्वार (हरिद्वार) गए॥21॥
 
We have heard that those great-hearted gods, sitting on planes as radiant as the sun and the fire, took the permission of Mahadevji and went to Gangadwar (Haridwar). ॥ 21॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)