श्री महाभारत  »  पर्व 12: शान्ति पर्व  »  अध्याय 283: शिवजीद्वारा दक्षयज्ञका भंग और उनके क्रोधसे ज्वरकी उत्पत्ति तथा उसके विविध रूप  »  श्लोक 10-11
 
 
श्लोक  12.283.10-11 
सनत्कुमारप्रमुखास्तथैव च महर्षय:।
अङ्गिर:प्रमुखाश्चैव तथा देवर्षयोऽपरे॥ १०॥
विश्वावसुश्च गन्धर्वस्तथा नारदपर्वतौ।
अप्सरोगणसंघाश्च समाजग्मुरनेकश:॥ ११॥
 
 
अनुवाद
सनत्कुमार आदि महर्षि, अंगिरा आदि देवर्षि, विश्वावसु गंधर्व, नारद, पर्वत तथा अप्सराओं के अनेक समुदाय उस पर्वत पर महादेवजी की पूजा करने आते थे। 10-11॥
 
Sanatkumar etc. Maharshi, Angira etc. and other Devarshis, Vishwavasu Gandharva, Narada, Parvat and many communities of Apsaras used to come to that mountain to worship Mahadevji. 10-11॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)