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mahabharat 12.282.62: इस प्रकार देवराज इन्द्र ने अपनी सूक्ष्म बुद्धि से महान् दैत्य वृत्र का वध कर दिया।   |   mahabharat अध्याय 12.282: वृत्रासुरका वध और उससे प्रकट हुई ब्रह्महत्याका ब्रह्माजीके द्वारा चार स्थानोंमें विभाजन   ।   mahabharat पर्व 12: शान्ति पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 12: शान्ति पर्व  »  अध्याय 282: वृत्रासुरका वध और उससे प्रकट हुई ब्रह्महत्याका ब्रह्माजीके द्वारा चार स्थानोंमें विभाजन  »  श्लोक 62
 
 
श्लोक  12.282.62 
एवं शक्रेण कौरव्य बुद्धिसौक्ष्म्यान्महासुर:।
उपायपूर्वं निहतो वृत्रो ह्यमिततेजसा॥ ६२॥
 
 
अनुवाद
इस प्रकार देवराज इन्द्र ने अपनी सूक्ष्म बुद्धि से महान् दैत्य वृत्र का वध कर दिया।
 
In this way, the extremely illustrious king of the gods Indra, using his subtle intellect, slew the great demon Vritra. 62.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)