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श्लोक  12.282.61 
सर्वावस्थं त्वमप्येषां द्विजातीनां प्रियं कुरु।
इमे हि भूतले देवा: प्रथिता: कुरुनन्दन॥ ६१॥
 
 
अनुवाद
कुरुनन्दन! आप भी इन ब्राह्मणों से सभी अवस्थाओं में प्रेम करते हैं। वे इस पृथ्वी पर देवता के रूप में प्रसिद्ध हैं।
 
Kurunandan! You too love these Brahmins in all situations. He is famous as a god on this earth.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)