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mahabharat 12.282.57: हे मनुष्यों के स्वामी! इस प्रकार इन्द्र ने एक ब्राह्मण की हत्या कर दी थी। तब ब्रह्माजी की आज्ञा लेकर उन्होंने अश्वमेध यज्ञ किया।   |   mahabharat अध्याय 12.282: वृत्रासुरका वध और उससे प्रकट हुई ब्रह्महत्याका ब्रह्माजीके द्वारा चार स्थानोंमें विभाजन   ।   mahabharat पर्व 12: शान्ति पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
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श्लोक  12.282.57 
एवं शक्रेण सम्प्राप्ता ब्रह्मवध्या जनाधिप।
पितामहमनुज्ञाप्य सोऽश्वमेधमकल्पयत्॥ ५७॥
 
 
अनुवाद
हे मनुष्यों के स्वामी! इस प्रकार इन्द्र ने एक ब्राह्मण की हत्या कर दी थी। तब ब्रह्माजी की आज्ञा लेकर उन्होंने अश्वमेध यज्ञ किया।
 
O lord of men! In this way Indra had committed the murder of a brahmin. Then taking the permission of Brahmaji he performed the Ashwamedha Yagna.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)