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mahabharat 12.282.56: युधिष्ठिर! तत्पश्चात वह ब्रह्महत्यारा देवराज इन्द्र को छोड़कर ब्रह्माजी की आज्ञा से उनके द्वारा दिये गये लोकों में चला गया।   |   mahabharat अध्याय 12.282: वृत्रासुरका वध और उससे प्रकट हुई ब्रह्महत्याका ब्रह्माजीके द्वारा चार स्थानोंमें विभाजन   ।   mahabharat पर्व 12: शान्ति पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 12: शान्ति पर्व  »  अध्याय 282: वृत्रासुरका वध और उससे प्रकट हुई ब्रह्महत्याका ब्रह्माजीके द्वारा चार स्थानोंमें विभाजन  »  श्लोक 56
 
 
श्लोक  12.282.56 
ततो विमुच्य देवेन्द्रं ब्रह्मवध्या युधिष्ठिर।
यथा विसृष्टं तं वासमगमद् देवशासनात्॥ ५६॥
 
 
अनुवाद
युधिष्ठिर! तत्पश्चात वह ब्रह्महत्यारा देवराज इन्द्र को छोड़कर ब्रह्माजी की आज्ञा से उनके द्वारा दिये गये लोकों में चला गया।
 
Yudhishthira! Thereafter, leaving the King of Gods Indra, that brahmin-killer went to the abodes given by Brahmaji as per his orders.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)