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mahabharat 12.282.50: हे शत्रुओं का नाश करने वाले प्रभु! हे देव! लोकनाथ! हम आपकी आज्ञा से आपकी सेवा करने आए हैं। कृपया हमें आज्ञा दीजिए कि हम क्या सेवा करें?॥50॥   |   mahabharat अध्याय 12.282: वृत्रासुरका वध और उससे प्रकट हुई ब्रह्महत्याका ब्रह्माजीके द्वारा चार स्थानोंमें विभाजन   ।   mahabharat पर्व 12: शान्ति पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
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श्लोक  12.282.50 
इमा: स्म देव सम्प्राप्तास्त्वत्सकाशमरिंदम।
शासनात् तव लोकेश समाज्ञापय न: प्रभो॥ ५०॥
 
 
अनुवाद
हे शत्रुओं का नाश करने वाले प्रभु! हे देव! लोकनाथ! हम आपकी आज्ञा से आपकी सेवा करने आए हैं। कृपया हमें आज्ञा दीजिए कि हम क्या सेवा करें?॥50॥
 
‘O Lord, the destroyer of enemies! O Deva! Loknath! We have come to serve you by your order. Please order us, what service should we perform?’॥ 50॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)