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mahabharat 12.282.43: तत्पश्चात लोकपितामह ब्रह्माजी ने अप्सराओं को बुलाकर उन्हें मधुर वचनों से सान्त्वना दी और कहा- 43॥   |   mahabharat अध्याय 12.282: वृत्रासुरका वध और उससे प्रकट हुई ब्रह्महत्याका ब्रह्माजीके द्वारा चार स्थानोंमें विभाजन   ।   mahabharat पर्व 12: शान्ति पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 12: शान्ति पर्व  »  अध्याय 282: वृत्रासुरका वध और उससे प्रकट हुई ब्रह्महत्याका ब्रह्माजीके द्वारा चार स्थानोंमें विभाजन  »  श्लोक 43
 
 
श्लोक  12.282.43 
आहूयाप्सरसो देवस्ततो लोकपितामह:।
वाचा मधुरया प्राह सान्त्वयन्निव भारत॥ ४३॥
 
 
अनुवाद
तत्पश्चात लोकपितामह ब्रह्माजी ने अप्सराओं को बुलाकर उन्हें मधुर वचनों से सान्त्वना दी और कहा- 43॥
 
India After that, Lokpitamah Brahmaji called the Apsaras and consoled them with sweet words and said - 43॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)